सूतक मार्गदर्शन
जन्म सूतक
| जन्म सूतक | सामायिक/मन में प्रतिक्रमण, प्रतिक्रमण-सूत्र पाठ पूर्वक दर्शन/अग्रपूजा | अंगपूजा | गोचरी वोहराना |
|---|---|---|---|
| (१) प्रसूता को (माता) | ३० दिन बाद हो सकता है | ४० दिन बाद | |
| (२) नवजात शिशु को | - | १૧ दिन बाद हो सकता है | |
| (३) घर में रहने वाले पारिवारिक सदस्यों को | स्पर्श किया हो तो स्नान के बाद | स्नान करके उसी दिन से | ११ दिन बाद |
| (४) प्रसूता मायके में हो तो ससुराल पक्ष को / ससुराल में हो तो मायके पक्ष को | सूतक लगता ही नहीं, सब कुछ किया जा सकता है। (११ दिन के अंदर स्पर्श किया हो तो स्नान के बाद सब हो सकता है।) | ||
| (५) अलग रसोई में भोजन करने वाले पारिवारिक सदस्यों को | सूतक लगता ही नहीं, अन्यत्र स्नान कर सब कुछ किया जा सकता है। (११ दिन के अंदर स्पर्श किया हो तो स्नान के बाद सब हो सकता है।) | ||
| (६) दूर देश / परदेस में रहने वाले परिवारजनों को | सूतक लगता ही नहीं, अन्यत्र स्नान कर सब कुछ किया जा सकता है। (११ दिन के अंदर स्पर्श किया हो तो स्नान के बाद सब हो सकता है।) | ||
| (७) एक ही रसोई में भोजन करने वालों को | स्नान कर उसी दिन से | ११ दिनों में जिस दिन भोजन करें तब से ११वें दिन तक नहीं हो सकता। | १૧ दिन बाद |
| (८) बच्चे को खिलाने/दुलारने आए स्पर्श करने वालों को | ११ दिन के अंदर स्पर्श किया हो तो स्नान के बाद सब हो सकता है। | ||
✿ घर में रहने वाले या बाहर से आए व्यक्ति यदि ११ दिनों में बच्चे को स्पर्श करें और प्रसूता की रसोई व स्नानघर अलग हो, तो स्नान करके पूजा आदि सब किया जा सकता है।
मरण सूतक
| मरण सूतक | सामायिक/प्रतिक्रमण-सूत्र पाठ पूर्वक दर्शन/अग्रपूजा | अंगपूजा एवं गोचरी वोहराना |
|---|---|---|
| (१) घर में रहने वाले परिवारजनों को | स्नान करने के बाद | शोक उतारने के बाद (दूसरे या तीसरे दिन) |
| (२) अन्यत्र रहने वाले परिवारजनों को (शव को छुआ/नहीं छुआ/श्मशान गए) | स्नान करने के बाद | शोक उतारने के बाद (दूसरे या तीसरे दिन) |
| (३) दूर देश में रहने वाले परिवारजनों को (शव को नहीं छुआ, श्मशान नहीं गए) | निषेध नहीं है (तत्काल अनुमत) | दूसरे दिन से |
| (४) जिन्होंने शव को स्पर्श किया हो (पारिवारिक सदस्य नहीं हैं) | स्नान करने के बाद | |
| (५) श्मशान गए लोगों को (शव को स्पर्श नहीं किया, परिवार के सदस्य नहीं हैं) | સ્नान करने के बाद | |
(१) यदि जन्म के उसी दिन मृत्यु हो जाए, तो दूसरे दिन से सब कुछ किया जा सकता है।
(२) जितने महीने का गर्भ गिरे (गर्भपात), उतने दिन परिवारजनों को सूतक लगता है।
(३) अपने घर में सेवक/सहायक का जन्म या मरण होने पर १ दिन का सूतक मानना।
